रौशन जमाल-ए-यार

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रौशन जमाल-ए-यार..
रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
देखा हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम
हैरत गुरुर-ए-हुस्न से शोखी से इज़तराब
दिल ने भी तेरे ​सीख लिए हैं चलन तमाम
अल्लाह रे हुस्न-ए-यार की खूबी के खुद-ब-खुद
रंगीनियों में डूब गया पैरहान तमाम
देख तो हुस्न-ए-यार की जादुई निगाहें
बेहोश एक नज़र में हुई अंजूमन तमाम

This is a great तेरे आंसू शायरी. If you like तेरे ख्वाब शायरी then you will love this. Many people like it for अंजुमन ए शायरी. Share it to spread the love.

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