कभी ज़िंदगी में ऐसी शाम तो आए

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कभी ज़िंदगी में ऐसी शाम तो आए
बेचैन सी इन सांसो को आराम तो आए
ना रह जाएगी कोई रज़ा फिर उस खुदा से दोस्तो
इकरार का उनका कोई पैगाम तो आए

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