ढूँढोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम

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ढूँढोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम
जो याद न आए भूल के फिर ऐ हम-नफ़सो वो ख़्वाब हैं हम

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