एकलव्य आज जिंदा होता तो द्रोणचार्य को कोस रहा होता

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एकलव्य आज जिंदा होता तो द्रोणचार्य को कोस रहा होता,
बिना अंगूठे के ना तो उसका आधार कार्ड बनता और ना जियो की सिम मिलती।

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