ज़रा गौर फरमाईएगा

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ज़रा गौर फरमाईएगा, कविता का नाम है - "दो बूंद" सुनिए ..... . . . . . . . . . . . . . ."टपक ! टपक !!" शुक्रिया, उम्मीद है की पसन्द आई होगी."

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