हमारी शक्सियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे गालिब

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हमारी शक्सियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे गालिब.., के हम तो कब्रीस्तान से भी गुज़रते है तो मुर्दे उठ कर कहते है. ........ . . . . . . . . .. . . . भाइ लगी कही नौकरी

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