हुस्ने जानां ने करम जब से किया है मुझपे

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हुस्ने जानां ने करम जब से किया है मुझप
ज़िन्दगी में मेरी खुशियों के गुले तर आये
आ गया बन के भगत सिंह कोई अशफा उलत
ज़ुल्म जब हिन्द पे ढाने को सितमगर आय

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