​कभी यूँ भी आ मेरी आँख में ​कि मेरी नज़र को ख़बर न हो​

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​कभी यूँ भी आ मेरी आँख में ​कि मेरी नज़र को ख़बर न हो​;
तु ही रहे मेरी निगाहों में, बस किसी और का ज़िक्र ना हो;
इतनी सी गुजारिश है मेरी एक रात ​ इस तरह नवाज़ दे​ मुझे
फिर गम नही मुझे चाहे उस रात की कभी सहर न हो​

This is a great नज़र अंदाज़ शायरी. If you like मेरी खामोशी शायरी then you will love this. Many people like it for मेरी जिंदगी शायरी.

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