मुक्कदर का गरीब

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मुक्कदर का गरीब, दिल का अमीर था
मिलकर बिछड़ना मेरा नसीब था
चाह कर भी कुछ कर न सके हम
घर जलता रहा और समुन्दर करीब था

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