ख़िरद वालों से हुस्न ओ इश्क़ की तन्क़ीद क्या होगी

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ख़िरद वालों से हुस्न ओ इश्क़ की तन्क़ीद क्या होगी
न अफ़्सून-ए-निगह समझा न अंदाज़-ए-नज़र जाना
शब्दार्थ
अफ़्सून-ए-निगह = नज़र का जाद

This is a great इश्क़ की शायरी. If you like क्या कहु शायरी then you will love this. Many people like it for हुस्न तारीफ शायरी.

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