मैं तेरी शायरी

कहाँ ले जाऊँ दिल

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रुस्वाइयाँ ग़ज़ब की हुईं

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तेरे दर से उठकर

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कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्किल है

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