कितने अरमानो को दफनाये बैठा हूँ

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कितने अरमानो को दफनाये बैठा हूँ
कितने ज़ख्मो को दबाये बैठा हूँ
मिलना मुश्किल है उनसे इस दौर में
फिर भी दीदार की आस लगाये बैठा हूँ

This is a great अरमानो की शायरी.

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