मिलने को तो ज़िंदगी में

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मिलने को तो ज़िंदगी में..
मिलने को तो ज़िंदगी में कईं हमसफ़र मिले
पर उनकी तबियत से अपनी तबियत नही मिली;​
चेहरों में दूसरों के तुझे ढूंढते रहे दर-ब-दर
सूरत नही मिली, तो कहीं सीरत नही मिली;​

​बहुत देर से आया था वो मेरे पास यारों​​;​
​अल्फाज ढूंढने की भी मोहलत नही मिली​​;​

तुझे गिला था कि तवज्जो न मिली तुझे;​

मगर हमको तो खुद अपनी मुहब्बत नही मिली​​;​
.
​हमे तो तेरी हर आदत अच्छी लगी "फ़राज़"​​
पर अफ़सोस तेरी आदत से मेरी आदत नही मिली​।

This is a great ज़िंदगी की शायरी. If you like मिलने कि शायरी then you will love this. Many people like it for मिलने की आस शायरी.

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