सदियों से जागी आँखों को एक बार सुलाने आ जाओ

SHARE

सदियों से जागी आँखों को एक बार सुलाने आ जाओ
माना कि तुमको प्यार नहीं, नफ़रत ही जताने आ जाओ
जिस मोड़ पे हमको छोड़ गए हम बैठे अब तक सोच रहे
क्या भूल हुई क्यों जुदा हुए, बस यह समझाने आ जाओ

This is a great आँखों का काजल शायरी. If you like आँखों के लिए शायरी then you will love this. Many people like it for तेरी आँखों शायरी.

SHARE