ए काश वो किसी दिन

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ए काश वो किसी दि
ए काश वो किसी दिन तनहाइयों में आयें
उनको ये राजे दिल हम महफ़िल में क्या बतायें
लगता है डर उन्हें तो हमराज़ लेके आयें
जो पूछना है पूछे, कहना है जो सुनाएँ
तौबा हमारी हम जो उन्हें हाथ भी लगाएँ
ए काश वो किसी दिन तनहाइयों में आयें
उनको ये राजे दिल हम महफ़िल में क्या बताये
उन्हें इश्क ग़र ना होता पलके नही झुकाते
गालों पे सोख बादल, जुल्फो के ना गिरते
कर दे ना क़त्ल हमको मासूम यह अदाएँ
ए काश वो किसी दिन तनहाइयों में आयें
उनको ये राजे दिल हम महफ़िल में क्या बतायें

This is a great किसी की चाहत शायरी.

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