गुलों को छू के शमीम-ए-दुआ नहीं आई

SHARE

गुलों को छू के शमीम-ए-दुआ नहीं आई
खुला हुआ था दरीचा सबा नहीं आई
हवा-ए-दश्त अभी तो जुनूँ का मौसम था
कहाँ थे हम तेरी आवाज़ नहीं आई

This is a great तेरी आँखे शायरी. If you like आवाज़ पर शायरी then you will love this. Many people like it for तेरी खामोशी शायरी.

SHARE