कदम यूँ ही डगमगा गए रास्ते में

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कदम यूँ ही डगमगा गए रास्ते में
वैसे संभालना हम भी जानते थे
ठोकर भी लगी तो उसी पत्थर से
जिसे हम अपना मानते थे

This is a great रास्ते पर शायरी.

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