मुझको एक बार:

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मुझको एक बार
मुझको एक बार आजमाते तो सही
वो मेरी बज़्म में आते तो सही
मैंने रखा था सर-ए-शाम से घर को सजाकर
तुम न रुकते एक पल को आते तो सही
आपकी खातिर आपकी खुशियों की खातिर
खुद भी हो जाता नीलाम, बताते तो सही
यकीनन आपके हिस्से में रोशनी होती
शम्म-ए-वफ़ा दिल में एक बार जलाते तो सही
मैं भी इंसान हूँ पत्थर नहीं, क्यूँ ठुकराया
खुद हो जाता टुकड़े-टुकड़े बताते तो सही

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