इश्क़ को तक़लीद से

SHARE

इश्क़ को तक़लीद से..
इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर
दिल से गिरया आँख से फ़रियाद कर
बाज़ आ ऐ बंदा-ए-हुस्न मिज़ाज़
यूँ न अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर
ऐ ख़यालों के मकीं नज़रों से दूर
मेरी वीराँ ख़ल्वतें आबाद कर
हुस्न को दुनिया की आँखों से न देख
अपनी इक तर्ज़-ए-नज़र ईजाद कर
इशरत-ए-दुनिया है इक ख़्वाब-ए-बहार
काबा-ए-दिल दर्द से आबाद कर
अब कहाँ 'एहसान' दुनिया में वफ़ा
तौबा कर नादाँ ख़ुदा को याद कर

This is a great इश्क़ की शायरी. If you like इश्क़ पर शायरी then you will love this. Many people like it for इश्क़ मोहब्बत शायरी.

SHARE